Tuesday, January 27, 2009

साथ

कुछ अलग ही समां होता है
जब वो साथ होते है
कुछ हम मुस्कुरा लेते है
कुछ गुनगुना लेते है
गिन लेते है सब तारो को
सागर की लहरें चुरा लेते है
रात ढल न जाए
हम चाँद को ठहरा लेते है
कुछ यादो को दोहरा लेते है
होता है जब जुदा होने का वक्त
तुम हो पास मे दिल के
ख़ुद को इतना समझा लेते है