Tuesday, January 27, 2009

साथ

कुछ अलग ही समां होता है
जब वो साथ होते है
कुछ हम मुस्कुरा लेते है
कुछ गुनगुना लेते है
गिन लेते है सब तारो को
सागर की लहरें चुरा लेते है
रात ढल न जाए
हम चाँद को ठहरा लेते है
कुछ यादो को दोहरा लेते है
होता है जब जुदा होने का वक्त
तुम हो पास मे दिल के
ख़ुद को इतना समझा लेते है

6 comments:

Kishore Choudhary said...

sweet

dr. ashok priyaranjan said...

भाव और विचार के श्रेष्ठ समन्वय से अभिव्यक्ति प्रखर हो गई है ।

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

"VISHAL" said...

nice poem
-------------------------"VISHAL"

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

आनंदकृष्ण said...

आज आपका ब्लॉग देखा बहुत अच्छा लगा.... मेरी कामना है कि आपके शब्दों में नयी ऊर्जा, व्यापक अर्थ और असीम संप्रेषण की संभावनाएं फलीभूत हों जिससे वे जन-सरोकारों की अभिव्यक्ति का समर्थ माध्यम बन सकें....

कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारें.........

http://www.hindi-nikash.blogspot.com


सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर.

VisH said...

wahh wahhh aapki apni baat or chitta dono sundar hai....swagat hai....mere blog par bhi padharen

Jai Ho Magalmay Ho