Saturday, February 7, 2009

इश्क

फकत इश्क से गुजरा नही होता
अजनबी शहर मे सहारा नही होता
अजब होते है वो मंजर भी
जब साहिल का किनारा नही होता
जब बर्बादं होने को होती है जिंदगी
दिल से ये नज़ारा नही होता

4 comments:

प्रमोदपाल सिंह said...

वाह-वाह करने को जी चाहता हैं। जितनी सराहना की जाए कम हैं।-प्रमोदपाल सिंह
https://desurinews.blogspot.com

Nalin Mehra said...

kya likha hai, bahut khub.................... awesome work

RAVINDRA said...

from all i like this one much more .like some one is saying what i want to say .......

RAVINDRA said...

I will again say this is awersome .............