Saturday, May 2, 2009

साथ

अपने दर्दे दिल से हम उनको हँसाते रहे
हमारे दिल की बाते वो हँसी मे उडाते रहे
तन्हाइयो मे शामिल होना था उन्हें
वो हमारी बेचैनिया बढाते रहे
मजबूर थे हम उनके प्यार मे इतना की
उनकी खताओं को भी दिल से लगाते रहे
मुश्किल था उन से जुदा होना की हम
उनके साथ जीने की आस लगाते रहे
एक आंसू भी न छलके उनकी आँख से
उनके गमो से खुद को तड़पाते रहे
कभी तो समझेंगे वो हाले दिल
अब तक हम खुद को समझाते रहे
जब जब देखा उन्हें ख्वाबो मे
वो हमें अपना बनाते रहे
अब दूर जाने का वक्त आया तो
हम रोते रहे वो मुस्कुराते रहे


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